भाजपा बिहार मॉडल पर करे विचार, पसमांदा मुसलमान को साथ लेकर चलना फायदेमंद- वसीम राईन

भाजपा बिहार मॉडल पर करे विचार, पसमांदा मुसलमान को साथ लेकर चलना फायदेमंद- वसीम राईन

बाराबंकी। समय रहते भाजपा को ऐसे फैसले ले लेने चाहिए जिसका फायदा आने वाले चुनावों में मिल सके। जैसे बिहार में नीतीश कुमार ने पसमांदा मुसलमान को साथ लेकर कामयाबी पाई और कद्दावरों को धूल चटा दी उसी तरह भाजपा को भी पसमांदा समाज पर भरोसा करना होगा। साथ लेकर चलना होगा।
यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने अपने बयान में कही। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे 2022 के चुनाव में सपा को 38 प्रतिशत तो भाजपा को 42 प्रतिशत वोट हासिल हुए, भाजपा ने माना कि उसे 2 प्रतिशत पसमांदा समाज का वोट मिला। अब गौर करने लायक बात यह है कि अगर भाजपा को मिला 2 प्रतिशत पसमांदा वोट अगर सपा के पक्ष में चला जाता तो क्या हालात होते। इसी तरह बिहार में पसमांदा समाज के लिए काम कर उसे साथ लेकर नीतीश कुमार ने जिस तरह लालू परिवार को कदम थामने पर विवश कर दिया वह एक प्रमाण है।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि समय रहते भाजपा को पसमांदा मुसलमान को साथ ले लेना चाहिए जिससे आने वाले वक्त में उसे हार जैसी स्थिति का सामना न करना पड़े। पसमांदा समाज भी भाजपा के साथ चलने के लिए आतुर है और कांग्रेस सपा बसपा के धोखे के बाद उसे भी अगुवाई के लिए किसी बेहतर मंच की जरूरत है तलाश है। यह एक बेहतर मौका भाजपा के लिए है। वैसे भी पीएम मोदी ने कुछ ही समय पहले पसमांदा समाज का जिक्र किया उसे साथ लेकर चलनेह की बात कही पर वह अमल में नही आई। इसके ठीक उलट पसमांदा के रूप में ऐसे चेहरों को तरजीह दी गई जो चुनाव के किसी काम न आ सके। उन्होंने कहा कि इंडिया गठबंधन की राह में बाधा बनने के लिए जरूरी है कि भाजपा सही फैसले ले और खुद को चुनाव पूर्व ही मजबूत कर ले वरना उपचुनाव जैसे नतीजे आगे भी आते रहेंगे। जो कि चिंता का विषय है।

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