दशकों सत्ता में रहते हुए पंजा छाप पार्टी कांग्रेस ने देश की 85 फीसदी पसमांदा आबादी को उसकी किस्मत के सहारे छोड़ दिया। आज यह आबादी कांग्रेस से सवाल कर रही है कि सत्ता में लाने के लिए नींव का पत्थर साबित होते आये पसमांदा मुसलमानों ने कौन सा नुकसान कर दिया जो उसे राजनीतिक, शैक्षिक, सामाजिक, आर्थिक अधिकारो से वंचित रखा गया। कांग्रेस की बाँटो राज करो और भेदभाव भरी राजनीति के इससे बड़ा प्रमाण और भला क्या होगा।
यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन ने अपने एक बयान में कही है। कांग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने बाकायदा आंकड़ो के जरिये भेदभाव भरी राजनीति के दौर का जिक्र किया, बताया कि पूरे देश मे कुल 543 लोकसभा सीटे हैं। इनमे 84 सीटें एससी 47 एसटी हैं जबकि 218 सीटें मुस्लिम बाहुल्य हैं। इनमे 38 सीटों पर 20 फीसदी से अधिक, 35 सीटों पर 30 फीसदी वहीं 145 सीटों पर 11 से 20 फीसदी मुस्लिम आबादी है। देश मे पसमांदा मुस्लिम आबादी 85 प्रतिशत है। अब गौर करने लायक बात यह है कि जब जब कांग्रेस की सरकार बनने का वक़्त करीब आया तब तब मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर पसमांदा समाज ने किसी की परवाह किये बिना आंख बन्द कर पंजे वाली पार्टी को वोट दिया और सत्ता में बिठाया। हर बार यही उम्मीद रही कि आज नही तो कल कांग्रेस ख्याल करेगी और देश के अति पिछड़े दलित शोषित असहाय पसमांदा मुस्लिम समाज को उसके हक़ व हुकूक जरूर हासिल होंगे पर असल राजनीति तो कुछ और ही चल रही थी जिसे यह समाज समझ नही सका और इस्तेमाल होता रहा गया। दशकों सत्ता का स्वाद चखाने के बावजूद कांग्रेस ने एक बार भी इस समाज की पीठ पर हमदर्दी भरा हाथ नही रखा और न ही इसकी उन्नति के लिए कोई इशारा ही किया। 85 फीसदी पसमांदा मुस्लिम खुद को ठगा महसूस करता रहा गया।
वसीम राईन ने कांग्रेस से सवाल किया कि सिर्फ वोट लेने के लिए पसमांदा समाज का इस्तेमाल क्यों किया, क्या पसमांदा समाज इस देश का निवासी नही, क्या उसके अधिकार व जरूरते नही, क्या यह भेदभाव नही, क्या यह संविधान के उलट व्यवहार नही। दशको उपेक्षा का जवाब आज तक कांग्रेस नही दे सकी है। ठगी का शिकार होती आई इस आबादी ने मुस्लिम बाहुल्य सीटों पर भाजपा को यूं ही नही जितवाया। भाजपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज का जिक्र किया, चर्चा की हमदर्दी से बात की उसे करीब लाने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि हैरत तो इस बात पर हो रही कि पसमांदा मुस्लिम समाज के साथ लोकतांत्रिक देश मे हुए इस दुर्व्यवहार पर सबने चुप्पी साध रखी है। कांग्रेस ने जो किया उसी राह पर सब चल रहे हैं। पसमांदा मुसलमानों के पिछड़ेपन के लिए कांग्रेस तो जिम्मेदार है ही, खुद को मुसलमानों का रहनुमा कहने वाले संगठन भी खामोश हैं। सवाल जमीयत उल हिन्द के सर्वेसर्वा जनाब अरशद मदनी से भी है, मुसलमानों की रहनुमाई कर रहे जनाब अरशद पसमांदा मुसलमान की बात क्यो नही करते। सत्ता में रही कांग्रेस को इस समाज के लिए कुछ करने के लिए मजबूर क्यो नही किया। क्या उनकी नजर में भेदभाव भरी राजनीति ही लोकतंत्र है। आज दलित मुसलमान की बदतर हालत के लिए कांग्रेस के साथ ही इन संघठनो को ही जिम्मेदार ठहराया जाएगा। इस समाज के हक़ के सवाल पर सभी मुंह छिपाते घूम रहे हैं। आखिर कौन जवाब देगा।