पसमांदा मुसलमानो अखिलेश यादव धोखेबाज़ हैं वसीम राईन

पसमांदा मुसलमानो अखिलेश यादव धोखेबाज़ हैं वसीम राईन

लखनऊ। दशकों प्रदेश पर राज करने वाली सपा को पसमांदा दलित मुसलमान कभी नजर नही आया। इसके बावजूद पसमांदा मुसलमान दिन बहुरने की आस में सपा को सत्ता की दहलीज तक पहुँचाता रहा। सपा का दिल नही पसीजा और आज पसमांदा मुस्लिम की दलित से भी बदतर हालत के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है।

यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने अपने बयान में कही। उन्होंने कहा कि सपा धर्मनिरपेक्ष दल होने का दावा तो करती है पर उसका असली चेहरा कुछ और ही रहा। सपा हुकूमत ने अंग्रेजों के जुल्म को भी पीछे छोड़ दिया। गौर करने वाली बात है कि 20 साल से भी अधिक समय तक देश मे राज कर चुकी सपा से 85 फीसदी पसमांदा मुस्लिम आबादी का भला नही हो सका, जबकि पसमांदा मुस्लिम ने सपा को सत्ता तक पहुचाने में कोई कोताही कभी नही बरती। बिना किसी लोभ में पड़े यह समाज सपा का साथ देता रहा बस एक ही आस रही कि अन्य समुदायों की तरह पसमांदा मुसलमान का भी ख्याल रखा जाए और सत्ता, संगठन या सदन में हिस्सेदारी देकर विकास की मुख्यधारा से जोड़ दिया जाए पर सपा ने कभी इस ओर कोशिश नही की और न कभी भाषण आदि में जिक्र ही किया। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि सपा चाहती तो राज्यसभा भेजकर कम से कम पसमांदा मुस्लिम समाज को नुमाइंदगी दे ही सकती थी पर यह भी नही हो सका बस वोटबैंक बना कर रख दिया। सपा की ही देन है कि आज पसमांदा मुसलमान दलितों से भी खराब हालत में है। उसे हक़ हुकूक से वंचित रखकर सपा सरकार ने कभी आर्टिकल 341 पर धार्मिक पाबंदी पर राज्यसभा या लोकसभा में कोई आवाज़ नहीं उठाई । जबकि पसमांदा समाज सपा से सहयोग की आस लगाए बैठा था। उन्होंने कहा कि समाजवादी अव्वल दर्जे की मतलबपरस्त पार्टी है मुल्क में रहने वाला 85 फीसदी पसमांदा मुसलमान नही नजर आया बल्कि विदेश से आये अशरफ मुसलमानो तो मलाई काटने का पूरा मौका दिया गया बड़ी हुसयारी से अखिलेश यादव सदन में दूसरे को उकसा के एक मुस्लिम सांसद को कम करा दिया उसके बाद अपने को मुस्लिम हमदर्द बता रहे हैं क्या दोगला पन हैं पसमांदा मुसलमानो अखिलेश यादव धोखेबाज़ हैं अब हिस्सेदारी नही तो वोट नही निकाय चुनाव में बुरी तरह से सफाया होगा।

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