समाजवादी पार्टी ने पसमांदा मुसलमानो के साथ धोखा किया हैं वसीम राईन

समाजवादी पार्टी ने पसमांदा मुसलमानो के साथ धोखा किया हैं वसीम राईन

समाजवादी पार्टी कार्यकारिणी गठन ने एक बार फिर पसमांदा मुस्लिम समाज को निराश किया है। गठन में पसमांदा समाज के एकमात्र चेहरे को जगह देकर बड़ी संख्या में यादव बिरादरी को अहम पदों पर बिठाया है। ऐसा करके सपा मुखिया ने समाज को और नाराज कर दिया, भले ही वह नाराजगी दूर होने की गलतफहमी पाल बैठे हों।

यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन ने जारी एक बयान में कही है। उन्होंने कहा कि लगातार पतन और सत्ता से वंचित होने के बावजूद समाजवादी पार्टी के नेताओं में सुधार के संकेत नही दिख रहे हैं बल्कि मंशा के विपरीत काम करके अपनी जड़ में मट्ठा डालने का काम हो रहा है। पार्टी के नेता समाजवाद की बात तो करते हैं पर वास्तव में अब तक जातिवाद और परिवारवाद को बढ़ावा दिया है। लोकसभा चुनाव करीब है ऐसी स्थिति में सपा को हर कदम सोंच समझ कर उठाना चाहिए पर ऐसा नही हो रहा। इसका प्रमाण है हाल ही में किया गया कार्यकारिणी का विस्तार। उम्मीद के उलट सपा ने पसमांदा मुस्लिम समाज से मात्र एक चेहरे को ही संगठन में जगह दी, वह भी अंसारी बिरादरी को, जबकि बड़ी संख्या वाली राईन, कुरैशी, मंसूरी व हलवाई जैसी बिरादरी को सिरे से नकार दिया गया। यादव से दोगुना वोट देने वाले पसमांदा समाज को हाशिये पर रख यादव बिरादरी को जमकर तरजीह दी गई और पदों पर बिठाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सपा को सत्ता का सुख दिलाता आया पसमांदा मुस्लिम इस गठन से जरा भी खुश नही है। नेताओं ने एक बार फिर साबित कर दिया कि पसमांदा मुस्लिम सपा के लिए सिर्फ वोटबैंक ही है, असल मे फिक्र होती तो इस कदर उपेक्षा न की जाती। सपा नेतृत्व एक बात कायदे से समझ ले कि पसमांदा समाज को हिस्सेदारी नही तो उस दल को वोट नही।

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