मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को दिख गया जो समाज ख़तरे में बता दिया वसीम राईन

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड को दिख गया जो समाज ख़तरे में बता दिया वसीम राईन

मुस्लिमो के रहनुमा ही मुल्क के मुस्लिम समाज को भटकाने में लगे हुए हैं। सबसे ज्यादा उलझन में देश की 85 फीसदी पसमांदा मुस्लिम आबादी है जो इन रहनुमाओं की पूरब पश्चिम वाली बयानबाजी को लेकर असमंजस के गहरे तल पर हैं। फिलहाल दुविधा दूर करते हुए इन्हें वैचारिक मतभेद मिटाने होंगे ताकि सत्ता से लेकर विश्व मे एक संदेश जाए। भटकाव की नौबत न आने पाए। अब यह पहल चाहे महमूद मदनी जी की ओर से हो या फिर आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की तरफ से।
यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के प्रदेश अध्यक्ष वसीम राईन ने अपने एक बयान में कही है। उन्होंने बात साफ करते हुए कहा कि आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में बड़े उलेमा पहुंचे, खास बात यह कि देश मे मुसलमानों की हालत बेहद बदतर करार दी गई और सड़क पर उतर कर जवाब देने की खुली धमकी दी गई, वहीं मुसलमानों से कानून हाथ मे न लेने की अपील करते हुए धैर्य से काम लेने को कहा गया। उधर जमीयत उलेमा ए हिन्द के सदर मौलाना महमूद मदनी ने न सिर्फ भारत बल्कि विदेशी मुल्कों का दौरा कर भारत मे मुस्लिम समाज को बेहतर व सुकून भरी जिंदगी जीने की बात कही। उनका साफ कहना था कि हिंदुस्तान का मुसलमान बेहतर जिंदगी जी रहा है। इसे किसी भी तरह की कोई।दिक्कत नही है। यहां तक कि जब पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति जब भारत आये थे तो उनके सामने मौलाना महमूद मदनी ने देश मे मुसलमानों को बेहतर जिदंगी हासिल होने की बात कही थी। यह भी कहा था कि भारत मे मुसलमानों के साथ गैर मुस्लिम समुदाय मजबूती से खड़ा है, फिर बोर्ड को अचानक क्या दिख गया जो समाज खतरे में बता दिया।

प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि चाहे मौलाना महमूद मदनी हों या आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड, दोनो ही इस समाज के रहनुमा हैं। सही रास्ता व उचित फैसले लेने के लिए जिम्मेदार। एक देश मे मुसलमानों को सुखी बता रहा तो दूसरा दुखी। इनकी आपसी धींगामुश्ती से देश का 85 फीसदी पसमांदा मुस्लिम समाज घोर असमंजस में पड़ गया है। यह तय नही कर पा रहा कि वह खुद को सुखी माने या दुखी। दो नावो पर सवारी खतरनाक मानी जाती है, वह समाज दिशाहीन हो जाता है और इसके लिए रहनुमा ही जिम्मेदार कहे जाएंगे।
वसीम राईन ने कहा कि बयानों में विरोधाभास से दुनिया मे भी गलत सन्देश जा रहा है, भले ही दोनो में वैचारिक मतभेद हों एक दूसरे से से ताकतवर दिखने की होड़ हो, असल रहनुमा बनने की लड़ाई हो पर उन्हें इस मुद्दे पर एकराय होना होगा। क्योंकि पसमांदा मुस्लिम की उलझन दूर किये बिना भी कोई खुद को बेहतर साबित नही कर सकेगा और न ही इसका कोई राजनीतिक फायदा ही होने वाला है उल्टे सामाजिक राजनीतिक आर्थिक प्रगति से पिछड़े इस समाज को और नुकसान उठाना होगा।

Leave a comment