समाजवादी पार्टी कांग्रेस का ही दूसरा रुप हैं वसीम राईन

समाजवादी पार्टी कांग्रेस का ही दूसरा रुप हैं वसीम राईन

लखनऊ। समाजवादी पार्टी के मुखिया हों या उनकी पार्टी , सपने दिखाने में इनका कोई सानी नही। इनकी सारी राजनीति झूठ पर टिकी हुई है। सबकुछ किनारे कर सिर्फ पीडीए की ही बात की जाए तो सच सामने आ जाता है। न कोई एजेंडा न कोई घोषणापत्र बस कोरी बयानबाजी।
यह बात आल इंडिया पसमांदा मुस्लिम महाज के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष वसीम राईन ने अपने बयान में कही है। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी कांग्रेस का ही दूसरा रूप है। एक जैसे नेता एक जैसी विचारधारा और करनी भी एक। झूठ बोलने में बेहद माहिर। शायद कांग्रेस समाजवादी पार्टी की जनक है। कोरी बयानबाजी कर सपा के नेताओं ने पसमांदा मुसलमान को दशकों तक बरगलाने का काम किया। जब यहां फेल हो गए तब पिछड़ा दलित अल्पसंख्यक यानी पीडीए के भले की सोंच रखकर एक बड़े समाज को अपने पक्ष में करने का प्रयास शुरू लिया। सपा के मुखिया यह क्यों भूल जाते हैं कि किसी भी समाज का वोट हासिल करने के लिए पुराने सिद्धांत अब बेकार हो गए हैं अब बिना किसी प्लान व एजेंडे के इतने बड़े समाज को उल्लू नही बना सकते। इन दोनों कामो में समाजवादी पार्टी अब तक फेल नजर आई है। पीडीए को लक्ष्य तो बना लिया पर उनके लिए अब तक किया कुछ भी नही और न ही कोई स्पष्ट नीति ही है। इससे जाहिर है कि सपाई एक बार फिर पीडीए समाज को वोटबैंक बनाने के फेर में हैं।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने कहा कि पसमांदा मुसलमान को दलित से बदतर बनाने वाली कांग्रेस की राह पर चलते हुए सपा ने भी वही चोला ओढ़ लिया। 85 फीसदी पसमांदा समाज को सिर्फ वोटबैंक बनाकर रख दिया अब पिछड़ा दलित व अल्पसंख्यक को बेवकूफ बनाने की तैयारी है। पसमांदा मुसलमान ने सपा के आधार वोट यादव से भी दो गुना वोट दिया सत्ता में लौटने की चाभी दी पर बदले में उसे कुछ हासिल नही हुआ। हैरत की बात तो यह है कि श्री अखिलेश यादव जब सत्ता के सिंघासन पर विराजते हैं तब उन्हें पीडीए की याद क्यों नही आई अब जब लोकसभा चुनाव सर पर है तब यह शिगूफा आज तक यादव से दो गुना वोट देने वाले पसमांदा मुसलमान को राज्यसभा नहीं भेजा सिर्फ़ वोट बैंक की तरह इस्तेमाल किया हैं।

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